महेंद्र सिंह धोनी, जिसे लोग प्यार से "माही" या "कैप्टन कूल" कहते हैं, भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल और प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में से एक हैं। उनका जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची, झारखंड (तत्कालीन बिहार) में हुआ था। धोनी का जीवन और करियर प्रेरणादायक है, जो संघर्ष, समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रतीक है।

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  महेंद्र सिंह धोनी, जिसे लोग प्यार से "माही" या "कैप्टन कूल" कहते हैं, भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल और प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में से एक हैं। उनका जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची, झारखंड (तत्कालीन बिहार) में हुआ था। धोनी का जीवन और करियर प्रेरणादायक है, जो संघर्ष, समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रतीक है। ### प्रारंभिक जीवन:  धोनी का बचपन साधारण था। उनके पिता पान सिंह एक पंप ऑपरेटर थे, और परिवार आर्थिक रूप से मिडिल क्लास था। धोनी को बचपन से ही खेलों का शौक था, लेकिन उनका झुकाव फुटबॉल की ओर ज्यादा था। वे अपने स्कूल की फुटबॉल टीम के गोलकीपर थे। उनके कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें क्रिकेट की ओर प्रेरित किया। इसके बाद धोनी ने क्रिकेट में हाथ आजमाना शुरू किया और स्कूल क्रिकेट टीम के लिए विकेटकीपर बने। ### करियर की शुरुआत: धोनी ने अपनी क्रिकेट की शुरुआत बिहार क्रिकेट टीम से की और बाद में झारखंड टीम के लिए खेला। उनका पहला बड़ा मौका 2004 में मिला जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के कारण उन्हें जल्द ही पहचान मिलने लगी। उ...

 

ताड़ के पेड़ होने से आकाशीय बिजली का प्रभाव होता है कम, जानिए क्या कहता है साइंस

देशभर में हर साल आकाशीय बिजली की चपेट में आने से सैकड़ों लोगों की जान जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ताड़ के पेड़ों पर आकाशीय बिजली का असर नहीं होता है और पेड़ सभी ऊर्जा को सोख लेती है.

देशभर में बरसात के समय आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सबसे ज्यादा होती है. कई बार आकाशीय बिजली के कारण जान-माल का नुकसान भी होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ओडिशा आकाशीय बिजली से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्यों में से एक है. ओडिशा सरकार ने आकाशीय बिजली को कम करने के लिए 20 लाख पेड़ लगाने वाली है. अब सवाल ये है कि क्या ताड़ के पेड़ के कारण आकाशीय बिजली पर प्रभाव कम पड़ता है. आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे.

बिजली गिरना

धरती पर आकाशीय बिजली गिरना एक प्राकृतिक आपदा है. आकाशीय बिजली को इंसान नहीं रोक सकता है. हर साल आकाशीय बिजली गिरने के कारण देशभर में भारी जान-माल का नुकसान होता है. भारत के ओडिशा राज्य में भी आकाशीय बिजली की घटनाएं बाकी राज्यों की तुलना में काफी अधिक होती हैं. बीते महीने अगस्त में सिर्फ बिजली गिरने के कारण ओडिशा में 2 दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे. वहीं ऐसी घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य की बीजेपी सरकार ने फैसला लिया है कि इस साल राज्य में 20 लाख ताड़ के पेड़ लगाए जाएंगे.

ताड़ का पेड़

बता दें कि ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया था कि ओडिशा में बिजली गिरने से होने वाली मौतों की दर भारत में सबसे अधिक है. इससे निपटने के लिए हमने पूरे राज्य में ताड़ के पेड़ लगाने की शुरुआत की है. क्योंकि ये पेड़ बिजली के अच्छे कंडक्टर की तरह काम करते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के हर वन प्रखंड की सीमा के पास ताड़ के चार पेड़ लगाए जाएंगे. इस पूरी योजना में करीब सात करोड़ रुपए का खर्च आएगा. ओडिशा में ताड़ के मौजूदा पेड़ों को काटने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति लिए अपने निजी ताड़ के पेड़ भी काटता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

पेड़ बिजली सोखता

बता दें कि पुराने जमाने में खेत बड़े होते थे और उनके चारों ओर पेड़ लगे रहते थे. ऐसे में बिजली पेड़ों पर ही गिरती थी और पेड़ उस ऊर्जा को सोख लेते थे. इससे खेतों में काम करने वाले लोगों को कोई नुकसान नहीं होता था. लेकिन बाद में धीरे-धीरे वे पेड़ कटने के कारण खेतों में पेड़ नहीं बचे हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि खेतों में काम करने वाले किसान-मजदूर बिजली की चपेट में आ जाते हैं. 

ताड़ के पेड़ का बिजली से कनेक्शन

बता दें कि ताड़ के पेड़ इन मौतों को रोकने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं. जानकारी के मुताबिक जिस पेड़ में जितना ज्यादा पानी होता है, वह बिजली का उतना बढ़िया कंडक्टर होता है. ताड़ के पेड़ों के अंदर काफी पानी होता है, इसलिए ये दूसरे पेड़ों की तुलना में ज्यादा अच्छे कंडक्टर माने जाते हैं. इस पर कई अध्ययन भी हुए हैं. इसलिए ओडिशा सरकार योजनाबद्ध तरीके से ताड़ के पेड़ लगाने की योजना बनाई है. ये पेड़ बिजली गिरने की स्थिति में करंट को सोख लेंगे. वहीं इनसे इलाके की जलवायु भी बेहतर होगी.

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